Thursday, 16 December 2021

नादानी

बहुत कर ली जीवन में नादानी

छोड़ दे ये आदत पुरानी
ना कर अपनी मनमानी
काटोंसे भरे पड़े हैं रास्ते
संभल कर चलना दोस्त मेरे
वरना दे जायेंगे ज़ख्म की निशानी
और उलझ जायेगी जिंदगानी
उलझनेसे तो अच्छा है
सुलझ जाए ये  जिंदगी
तो  निखर आयेगी सादगी  ......

सौ. राजश्री सुहास जाधव.


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