बहुत कर ली जीवन में नादानी
छोड़ दे ये आदत पुरानी
ना कर अपनी मनमानी
काटोंसे भरे पड़े हैं रास्ते
संभल कर चलना दोस्त मेरे
वरना दे जायेंगे ज़ख्म की निशानी
और उलझ जायेगी जिंदगानी
उलझनेसे तो अच्छा है
सुलझ जाए ये जिंदगी
तो निखर आयेगी सादगी ......
सौ. राजश्री सुहास जाधव.
खुप सुंदर रचना 👌👌
ReplyDeleteखुपच सुंदर अप्रतिम
ReplyDeleteमस्तच ग 👌🏼👌🏼👌🏼
ReplyDeleteव्वा खूप छान
ReplyDeleteMastch रचना 👌👌👌
ReplyDeleteअतिशय सुंदर!✍️👌👌👌
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